National river linking project पर पिछले कयी सालोसे विचार मंथन चल रहा है । क्या है ये परियोजना इसपर नजर डालते है ।
National river linking project सही मायनेमे पहिलाबर राष्ट्रीय स्तर चर्चा का कारण बना 2002 मे एनडीए सरकार के कार्यकाल मे . ... इससे पहले इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल मे यानी 1982 मे इस योजना की रुपरेखा बनी थी । पर उस वक्त कमिटी तो बनी लेकीन उसपर कीसीने गंभिरतासे विचार बिमर्ष नही कीया । 2002 मे जब इसपर सुप्रिम कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी तब जाकर शिवसेना के पुर्व मंत्री सुरेश प्रभु के अध्यक्षता मे क्रिती समिती का गठन कीया गया । जीसे संसद की मंजूरी भी मिली , पर उसके बाद एनडीए सरकार गयी ओर युपीए ने माने इस योजना को थंडे बस्तमे डाल दिया ये कहकर की कयी राज्योका इस परियोजना को विरोध है ।
क्या है परियोजना
उत्तर की कयी नदीया हर साल बाड का तांडव करती है । एसी नदीयोका बेह जानेवाला पानी इस योजना के तहत छोटी नदीया ओर कैनोलोके जरीये सुखा पिडीती इलोकोतक पोहचाना था । इस योजना को दो हिस्सो मे बाटा गया था । पहिला हिस्सा हिमालय मे उगम पाने वाली नदिया गंगा ओर ब्रम्हपुत्रा इन नदीयो के पनी का संरक्षण करने के लीये जलाशयोका निर्माण करना . वही उत्तर की छोटी नदीयोको 14 जगहोपर जोडना .
वही दुसरे हिस्से मे दक्षिण भारत की महानदी ओर गोदवरी पानी पेन्नार , कृष्णा , कावेरी मे मोड दि जायेगी , केरल ओर कर्नाटक की नदीयो को पश्चिम की ओर मोडना भी इस परियोजना की उद्देश है ओर यही मुद्दा विरोध का कारण बना है ।
इस योजना की राष्ट्रीय जलसिंचन की क्षमता होगी 140 दशलक्ष हेक्टर वरून 160 दशलक्ष हेक्टर पर पोहच जायेगी । देश मे चेरापुंजी मे 11 हजार मिलीमीटर बारिश गिरती है वही अजमेर मे 200 मिलीमीटर भी नही । दश की 83 प्रतिशत खेती बारिश पर निर्भर है । इसी लिये जानकार ओर सुप्रिम कोर्ट इस परियोजना का जरूरत महसुर कर रहे है ।
निलेश खरे मुंबई
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